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रिस्क मैनेजमेंट: वह स्किल जो तय करती है आप टिकेंगे या नहीं

अपडेट किया गया: अगस्त 2026 · PaperBull संपादकीय टीम द्वारा

संक्षिप्त उत्तर: ऑप्शन ट्रेडिंग में रिस्क मैनेजमेंट का मतलब है यह तय करना कि कोई एक ट्रेड, दिन या हफ्ता आपकी कैपिटल का कितना हिस्सा खा सकता है — 2% रूल, तय स्टॉप-लॉस, और डेली/वीकली लिमिट इसका आधार हैं।

यहां जाएं: नियम 1: 2% रूल · नियम 2: एंट्री से पहले स्टॉप-लॉस तय करें · नियम 3: डेली और वीकली लॉस लिमिट

एक कड़वी सच्चाई: चार्ट पढ़ना और दिशा पकड़ना आपकी सफलता का सिर्फ 30% हिस्सा है। बाकी 70% रिस्क मैनेजमेंट है।

नियम 1: 2% रूल

किसी भी एक ट्रेड में अपनी कैपिटल का 2% से ज्यादा रिस्क न लें। ₹5,00,000 की कैपिटल पर यह ₹10,000 है। इससे लगातार 10 हारी हुई ट्रेड के बाद भी 80% कैपिटल बची रहती है।

नियम 2: एंट्री से पहले स्टॉप-लॉस तय करें

बायर के लिए आम नियम है 50% वैल्यू गंवाने पर बाहर निकलना। सेलर के लिए प्रीमियम दोगुना होने पर बाहर निकलना।

नियम 3: डेली और वीकली लॉस लिमिट

  • डेली लिमिट: कैपिटल का 3-4%
  • वीकली लिमिट: कैपिटल का 6-8%
भारत में F&O खाता खत्म होने की #1 वजह: ओवरलेवरेजिंग — किसी एक ट्रेड में इतना ज्यादा पैसा लगाना कि एक सामान्य मार्केट स्विंग भी झेली न जा सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑप्शन ट्रेडिंग में 2% रूल क्या है?

किसी भी एक ट्रेड में अपनी कुल ट्रेडिंग कैपिटल का 2% से ज्यादा रिस्क न लेना।

हारती हुई पोज़िशन में एवरेज डाउन क्यों नहीं करना चाहिए?

क्योंकि ऑप्शन एक्सपायर हो जाते हैं — गलत दिशा में और लॉट जोड़ने से नुकसान ही बढ़ता है।

PaperBull पर रिस्क मैनेजमेंट की आदत डालें

स्टॉप-लॉस लगाना और डेली लिमिट फॉलो करना वर्चुअल कैपिटल से प्रैक्टिस करें, लाइव मार्केट पर।

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